alpa loiya थोड़ा लेके जी रहा हूँ म्याय , फिरभि उससे कना भी छूट जाए



थोड़ा लेके     जी रहा हूँ म्याय ,
फिरभि उससे कना भी छूट जाए 
दिल तोड़ जाती है , प्राण रोती है। 

नदी जैसे बेकार कोशिश में
पानी को छीने छे बांधके रखना चाहें
पानी तो नदी को सीने तोड़  कर 

लहरें बनके कहां चली जाती हैं? 


जो कुछ भी आते, और  चला जाते 
सब कुछ दे दूँ  तुमको , खोने का डर मेरा भागेगा। 
तेरा चरणमे कोई नहीं क्षय, सब कुछ भी सुरक्षित है ,
महामहिमा तबो दयामय। 

तुमपे आश्रित कितने ग्रह सितारे भानु 

खो नहीं जाते फिर कोई अनु परमाणु ,
मेरा खोया हुआ छोटी छोटी धन
मुझे मिलेगा की  नहीं  तबो चरणमें ??
जरूर सब मुझे  सुरक्षित मिलेंगें।

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