आपने मुझे अनंत बनाया है, ऐसा लीलामय तू , खाली कर दिया फिरसे भर दिया - बारी बारी नई जीवन डालके। कितने पहाड़, कितनी नदियाँ किनारे मेरा ऐ बांसुरी लेके घूमते रहा थे कितने धुन यो बजाते चलें , किसको बताऊं, फिर क्येसे। आपका यही अमृत परसन मेरा दिल यो - खोई हुई सीमा बहुत आनंद में उथल पाथल हो गई। मेरे पास बस एक मुट्ठी है भर दिया दान दिवस - विभावरी, सभी के लिए, उम्र के लिए नहीं ...