89. I AM GREATER THAN DEATH [ মৃত্যুঞ্জয় ] 101.
101. [तू मृत्यु ,म्याय हूँ मृत्युंजय ]
[I AM GREATER THAN DEATH]
[I AM GREATER THAN DEATH]
दूर से यब देखा तो ऐसा लगा
तु हो हि दुर्जय ,
धरती कंपती है तेरा ही कठोर शासनदंडा से
धरती कंपती है तेरा ही कठोर शासनदंडा से
तु हि हो असली डरावनी।
दुःखीजन की फटी हुई छाती में
फिर दुःख की लौ ज्वाला देता हो ।
फिर दुःख की लौ ज्वाला देता हो ।
तेरा दाहिने हाथ का खोल
तूफान के बादलों में बढ़ गया है
यह वहाँ से बिजली खींच लेता हो ।
मेरे सीने में डर आ गया।
कांपता हुंया आगे बढ़ा -तो ऐसे लगा
तेरा भ्रूभंग आसन्न कयामत की लहर है।
तूफान के बादलों में बढ़ गया है
यह वहाँ से बिजली खींच लेता हो ।
मेरे सीने में डर आ गया।
कांपता हुंया आगे बढ़ा -तो ऐसे लगा
तेरा भ्रूभंग आसन्न कयामत की लहर है।
नमिल आघात तेरा, मुझे मारा।
पसली कांपने लगी,
छाती पर हाथ दबा के
पसली कांपने लगी,
छाती पर हाथ दबा के
मैंने पूछा, 'क्या कुछ और है,
क्या कोई बिजली बची है? '
नमिल ने मारा।
सिर्फ यह? और कुछ नहीं?
भय टूट गया।
जब आपकी गरज तैयार थी
तु मुझसे बड़े लगने लगा।
जब तुम्हारा दिया हुंया चोट के साथ,
खुदही नीचे चल आ गया
मेरी जमीन की तरह।
आज तू छोटे हो गए हो ।
मेरी सारी शर्म टूट गई।
तु जितने भी बड़े हो, तू मृत्यु हि तो हो -
मृत्यु से बड़े नहीं हो।
"मैं मृत्यु से बड़ा हूं ",
यह अंतिम सच बोलके
खुद हि जाऊँगा मैं चलके।
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